Wednesday, July 12, 2017

जीवन चक्र


जीवन कि शुरुआत बच्चे के जन्म के साथ होती है, माँ ही उसकी दुनियाँ होती  है और माँ के लिए वो ही दुनियाँ। थोड़ा बड़ा होने पर लाड दुलार के साथ वो खुद कि दुनियाँ में अपने परिवार जनो को जोड़ता है, अभी भी माता पिता  की अहम् भूमिका होती है और समय के साथ-साथ भाई-बहनों की भी अहमियत बढ़ती जाती है।

किशोरवय आते आते उसकी प्राथमिकताएं बदलती हैं, मित्र थोड़े करीब और माता-पिता थोड़े दूर हो जाते हैं। इसी समय माता-पिता की नज़र में भी उसकी अच्छाइयों के साथ साथ बुराइयां दिखाई देने लगती हैं। यह मन की दूरी बढ़ते जीवन के साथ बढ़ती जाती हैं । जो  कभी जान से भी प्यारा था, अब निराशाजनक और बुरा लगने लगता है। व्यस्क होते बेटे और पिता के संवाद अब झगडे का  रूप ले लेते हैं। "मुझे पैदा क्यों किया" से ले कर तुम आये ही क्यों दुनियाँ में" तक, विचारों की भिन्नता कब अहम् की चादर ओढ़ लेती है पता ही नहीं चलता।

जवानी का  जोश जहाँ किसी की परवाह नहीं करता वही, किसी और की जरुरत भी महसूस नहीं होने देता।
 आत्मविश्वास से पाइ गयी , नौकरी में प्रगति और  दोस्तों का साथ,  जैसे हर रास्ते को मुमकिन बनाने की ताकत दे देता  है।

शादी के साथ ही उसके संसार में एक नए सदस्य के पदार्पण होता है। एक दूसरे को समझने के प्रयास में आकर्षण और प्रेम पनपता है । एक समय आता है जब पति पत्नी एक दूसरे में ही अपनी दुनियाँ ढूंढ लेते हैं, पर समय का  नियम फिर काम करने लगता है।  बदलता वक्त सबसे प्रिय व्यक्ति को बुरा साबित करने लगता है। बच्चे के जन्म के साथ फिर  एक नया समय चक्र चालू हो जाता है।

ऐसा नहीं है की समय का रिश्तों के साथ सिर्फ यही अकेला नियम है, दूसरा नियम तो हमे सोचने पर मजबूर कर देता है। जब व्यक्ति बूढ़ा हो जाता है और कुछ करने लायक नहीं रहता, तब यही नियम उल्टा हो जाता है । अब दूसरों से व्यक्ति की अपेक्षाए बढ़ जाती हैं, अपने द्वारा की गई गलतियों के पश्च्याताप होने लगता है ।
माता पिता की सही कीमत पता चलती है और लगता है की सब साथ रहे, सब साथ दें।
पर समय तो समय है नीम, बबूल बोने पर आम की अपेक्षा व्यर्थ है, क्योकि तब आस पास के लोग अपने उस दौर से गुजरते रहते हैं जब उन्हें किसी की जरुरत नहीं होती ।

इस चक्र में एक बीच का रास्ता भी होता है जो "आज" से गुजरता है । अपने आज में जो आपके साथ हैं उनकी कीमत पहचानकर हम अपना "आने वाला कल" बदल सकते हैं । अपने आज के  व्यव्हार की मधुरता हमें हमारे उस जरुरत के वक्त में मिठास भरेगी । माता पिता, भाई बहन , पत्नी, संतान या मित्र सम्बन्धी , इन सबसे आज किया मधुर व्यव्हार हमारे कल को उत्साह और आनंद से भर सकता है  । समय के क्या है..."कल" तो आना है और आकर रहेगा, जीवन चक्र  तो चलता  ही रहेगा और वो भी अपने नियमों पे । अब ये हम पर है की हम किस विकल्प को चुनते हैं । 

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