आज इक दुआ की है सिर्फ तुम्हारे लिए
जिंदगी को जीने की वजह दी है सिर्फ तुम्हारे लिए ..
दिल की विरानियो में, खुशियों की आहट बना
एक चिराग से रौशनी की है सिर्फ तुम्हारे लिए ...
चलकर अकेले इन राहों में, थक चुके हैं हमारे कदम
साथ चलने के इरादे से हाथ बढ़ाया है सिर्फ तुम्हारे लिए ...
ये सच है की तक़दीर लिखने वाला है कोई और
हथेली की लकीरों में लिख रहे हैं आज कुछ सिर्फ तुम्हारे लिए ...
इस बात के शायद तुम्हे इल्म भी ना हो कि
कोई चाहता है सारी दुनियां कि ख़ुशी सिर्फ तुम्हारे लिए ...

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