
क्यों कहेते हो की मेरे साथ कभी बेहतर नहीं होता है
ये कहो की जैसा चाहो वैसा नहीं होता ।
कोई कह देता है, कोई सह लेता है ,
आँखों से बड़ा, आंसुओ का समुन्दर नहीं होता ।
आज अपनो ही सिखला दिया हमें कि
ठोकरे देने वाला, हमेशा पत्थर नहीं होता ।
कट ही जाते हैं मंजिल के लम्बे रास्ते
खुद के साये के सिवा, कोई और हमसफ़र नहीं होता ।
क्यों जींदगी कि मुश्किलों से हार बैठे हो ? वक़्त से बढ़कर कोई, मरहम नहीं होता ।

