Friday, April 30, 2010

ख्वाहिश और हकीकत


क्यों कहेते हो की मेरे साथ कभी बेहतर नहीं होता है
ये
कहो की जैसा चाहो वैसा नहीं होता

कोई
कह देता है, कोई सह लेता है ,
आँखों से बड़ा, आंसुओ का समुन्दर नहीं होता
आज अपनो ही सिखला दिया हमें कि
ठोकरे
देने वाला, हमेशा पत्थर नहीं होता
कट ही जाते हैं मंजिल के लम्बे रास्ते
खुद के साये के सिवा, कोई और हमसफ़र नहीं होता
क्यों जींदगी कि मुश्किलों से हार बैठे हो ? वक़्त से बढ़कर कोई, मरहम नहीं होता

कैसे करोगे !!!??

ये कहे ऐसे करोगे, वो कहे, वैसे करोगे,

ऐसा करोगे, वैसा करोगे, अब हम क्या बताये की, कैसे करोगे


जिसे लाइन में लगो, उसकी बगल की लाइन पहले बढे

जिस मिठाई पे हाँथ रखो, वो ही सबसे महेंगी मिले ।


ऐसा करोगे, वैसा करोगे अब हम क्या बताये की, कैसे करोगे ?


जब पढाई करो तो भुख लगे, जब लड़ाई करो तो प्यास

इस चक्कर में न भुख मिटे और न मिटे प्यास ।


ऐसा करोगे, वैसा करोगे अब हम क्या बताये की, कैसे करोगे ?


अजब दुनिया में हम फंसे अकेले, मिले भी कोई तो बिलकुल थकेले ,

रास्ता है लम्बा, मंजिल बहुत दूर, बिना कोई सहारे कैसे चलोगे ?


ऐसा करोगे, वैसा करोगे अब हम क्या बताये की कैसे करोगे ?


ये परेशान उससे, और वो परेशान इससे

हम परेशान तुमसे, तुम परेशान हमसे

परेशानी ही परेशानी में, समझमे न आए कैसे करोगे ?


ऐसा करोगे, वैसा करोगे अब हम क्या बताये की कैसे करोगे ?


अरे पर कुछ तो करो.......

Tuesday, April 20, 2010

"जीवन और उत्साह"

उत्साह एक बहुत बड़ा वरदान है. ईश्वर ने हमें अलोकिक शक्ति प्रदान की है, अतएव हमें अपना कार्य पूर्ण उत्साह से करना चाहिए. चाहे कार्य किसी भी प्रकार का हो उसे पूर्ण उत्साह के साथ करे, फिर देखिये "चमत्कार"

उमंग और उत्साह एक ऐसी "खुल जा सिम-सिम"है , जो आपके जीवन में बराबर प्रगति और सुख के खजाने पेश करती है. आप अपने आपको अनंत शक्ति और सामर्थ्य का स्वामी माने। प्रत्येक मनुष्य में कार्यक्षमता का अपार सागर लहरा रहा है, वह जो चाहे कर सकता है. हर समय अच्छे विचार अपने मन में लाये. आलस्य, निराशा, आराम या आज का काम कल पर न टाले, ऐसा करने से काम आपके लिए बोझ बन जायेगा. एक बार यदि ट्रेन अपनी पटरी से उतर जाये तो उसे पुनः पटरी पर लाने में बहुत कष्ट उठाना पड़ता है.

उदास और निराश व्यक्ति बिना तेल के दीपक जैसा होता है। मनुष्य उत्साह और सहस के बल पर जीवित रहता है, और विजयी बनता है. जिसके अंतर में उमंगें नहीं उठती, जो नीरस और निस्तब्ध रहता है, वह जींदगी को भार बनाये पशु की तरह जीता है ।

संसार विजयी व्यक्ति का स्वागत करता है । सब उसी मनुष्य को पसंद करते हैं जिसके चहरे से उत्साह और विक्रम झलक रहा हो । जिसके आने पर उत्साह और उल्लास की लहर दौड़ जाये, उसे लोग सर आँखों पर बिठालते हैं, सभी विजयी व्यक्ति पहले मन पर विजय प्राप्त करते हैं । उत्साह-हीनता एक घातक रोग है , जो हमारी योग्यता को नष्ट कर देता है. अदम्य इच्छा-शक्ति और कठिन परिश्रम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है ।

पारस्परिक सहयोग को मानव जीवन का अत्यधिक महत्वपूर्ण अंग माना गया है, हमें दूसरो के सहयोग से लाभ उठाना चाहिए तथा उन्हें लाभ पहुचने में सहयोग करना चाहिए। एकाकीपन एवं स्वार्थ-परता तुच्छ्ता की पहचान है । जब तक अंतीम सफलता प्राप्त न हो, आराम से न बैठे । अपनी एक विलक्षण पहचान बनाने के लिए कठोर परिश्रम करने पड़ते हैं।

साहसी व्यक्तियों को साहस उधार नहीं मागना पड़ता, किसी के सहयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती, उनकी अंतर-आत्मा ही उन्हें बल प्रदान करती है । मुलायम मिटटी के बिछोने में पड़ा बीज यदि ऊपर ढके ढेलो को धकेलने की हिम्मत नहीं दिखलाता तो बीज से वृक्ष बनने का गौरव उसे कैसे प्राप्त होता?

निति के पथ पर बढ़ने वाले को ईश्वर का विश्वास और उनका अनुग्रह काफी है, फिर संसार की कोई भी शक्ति उसे पराजीत नहीं कर सकती । उत्साही बनकर अपने लक्ष्य की ओर बढिये सफलता आपके कदम चूमेगी ।

"होके मायूस न यो शाम से ढलते रहिये, जींदगी भोर है सूरज से निकलते रहिये

एक ही पाव पे ठहरोगे तो थक जाओगे, धीरे धीरे ही सही रह पे चलते रहिये।"