बदला या बदलाव
मनुष्य में "अपेक्षा" की प्रकृति जन्मजात होती है । रोने के बदले दुलार, मुस्कुराने के बदले मुस्कराहट ..एक छोटे बच्चे को भी पता होता है कि किसके बदले क्या मिल सकता है । यह अपेक्षाए कब हमारे स्वाभाव का हिस्सा बन जाती हैं पता नहीं चलता, जब तक.....बदले में जो मिलता है उसकी अपेक्षा न हो।
चॉकलेट मांगता छोटा बच्चा तब चकित रह जाता है जब उसे कभी दुलार से चॉकलेट दिलाने वाले उसके माता-पिता, चॉकलेट के बदले सड़ते दाँतों का हवाला दे कर उसकी मांग पूरी करने से मना कर देते हैं । इस बदले का बदला वो गाला फाड़कर रो कर, जमीन पर लोट कर या बाहरी लोगों के बीच माँ - बाप का अपमान करके देता है, फिर इस जिद का बदला उसके गालों पर या पीठ पर नज़र आता है।
भौतिकी में पढ़ा न्यूटन का तीसरा नियम सभी बच्चों को सबसे पहले समझ आ जाता है (ये बात और है कि परीक्षा में भी पहला या दूसरा नियम पूछने पर वो तीसरे नियम की व्याख्या कर देते हैं ) । इस नियम के अनुसार " हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है", जीवन दर्शन का एक उत्कृष्ट नियम है यह ।
हर परिस्तिथी में सही बैठता है।
अब बात करते हैं "बदलाव" की... बदले की तरह ये हमारे अंदर ही होता पर चूँकि शिशु अवस्था में ये प्रकृति द्वारा चलित होता है (उदाहरण के लिए शारीरिक विकास भी एक बदलाव ही है पर प्रकृति शाषित) बड़े होने पर हम इसका महत्व भूल जाते हैं । सही समय पर सही बदलाव हमारे जीवन की दिशा बदल सकता है । किसी घटना (बुरी घटना) पर हम बदला या बदलाव के बीच अक्सर बदले को चुनते हैं और फिर शुरू हो जाती है बदले की क्रिया -प्रतिक्रिया (चेन रिएक्शन )। यहीं एक बार ही सही, अगर हम बदलाव को चुनकर देखे तो हमारा दृष्टिकोण निर्णयात्मक न हो कर सकारात्मक बदलाव का रहता है। तब हम समस्या के आकर की तरफ न देख कर समस्या के समाधान का विचार करते हैं । इस बदलाव की प्रक्रिया का एक और फायदा होता है की कौन सा बदलाव लाना है ये सोचने में हम अपनी पहली प्रतिक्रिया (जो की अधिकांशतः विरोद्ध या नकारात्मक प्रदर्शन होता है) नहीं देते । ये कुछ पल का अंतर्मुखी होना न सिर्फ हमें दूसरे की क्रिया और खुद के क्रोध से बचा लेता है अपितु सामने वाले को भी बदले की अपेक्षा बदलाव दिखा कर अचंभित और परेशान कर देता है । इस तरह क्रिया की प्रतिक्रिया न होकर दोनों पक्षों में एक सकारात्मक बदलाव दिखाई देता है ।
बदलाव को अपनाना आसान नहीं परन्तु इतना कठिन भी नहीं है । आखिर इसके "बदले" मिलने वाली ख़ुशी और सुकून का मोल दिलों में आने वाली दुरी से तो कही ज्यादा है। किसी भी परिस्थिति में बदला या बदलाव का चुनाव परिणाम को बदल सकता है । अब ये हम पर है की "बदले" के साथ मानसिक परेशानी और जलन को चुने या फिर खुद में "बदलाव" ला कर प्रसन्नता और शांति को ......फैसला हमारा है ।


