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Saturday, March 13, 2010


Old concept : Do or Die
New concept: Do b4 u die
Latest concept: Dont die,until u do


"The minute U think of giving up,
think of d reasons why u held on so long…"
Posted by Samridhi Kulkarni Paranjpe at 11:13 AM

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Samridhi Kulkarni Paranjpe
विचारों के इस मंच पर अपने विचार रखने से पहेले मैंने सोचा की क्या ये जरुरी है ? पहेला विकल्प मन में आया की नहीं, बिलकुल नहीं, समय व्यतीत करने के आलावा कुछ नहीं पर फिर दुसरे विकल्प पर ध्यान गया की इस दौड़ती भागती दुनिया में जब हमारे पास इतना भी समय नहीं की हम अपने आस-पास के लोगों की बात सुन सके या अपनी बात कह सके तो क्यों न अपने विचार लिख लिए जाए, इसका एक उपयोग यह होगा की मेरे उपलब्ध न रहेने पर भी मेरी बात लोगों तक पहुचेगी, और दूसरा की अपने विचारों पर दूसरों की प्रतिक्रिया (उनकी भी जिन्हें मैं नहीं जानती, पर फिर भी वो मेरे विचार जानना चाह रहे हैं) भी जान सकुंगी। कभी कभी किसी घटना पर जब हम प्रतिक्रिया देते हैं तो वो न सिर्फ हमारा अपना तर्क होता है परन्तु कही न कही हम उस घटना को स्वयं से जोड़ कर देखने लगते हैं की हम क्या कर सकते थे। इस ब्लॉग की शुरुआत मैं इसी अपेक्षा से कर रही हु की मेरे विचार ही मेरी भावना को सही अभिव्यक्ति दे सकते हैं।
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